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मल्टीग्रेन आटे में छिपा है सेहत का खजाना घर पर करें तैयार

  1 अगर आप मोटापे से परेशान है, तो इस प्रकार से अपने लिए मल्टीग्रेन आटा तैयार करें - पांच किलो गेहूं में एक किलो चना, एक किलो जौ, 250 ग्राम अलसी और 50 ग्राम मेथीदाना मिलाकर पिसवाएं। 2. अगर आप दुबलापन से निजात चाहते है, तो इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें - पांच किलो गेहूं में एक किलो चना, एक किलो जौ, 500 ग्राम सोयाबीन, एक किलो चावल का आटा डाल कर पिसवाएं। इस आटे के इस्तेमाल से आपको वजन बढ़ाने में मदद मिलेगी। 3. अगर आपको कब्ज की शिकायत रहती हो तो इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें - पांच किलो गेहूं में एक किलो चना, आधा किलो मक्का, एक किलो जौ और 250 ग्राम अलसी पिसवाएं। इससे कब्ज से मुक्ति पाने में आपको मदद मिलेगी। 4. जिन्हें डायबिटीज हैं वे इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें - पांच किलो गेहूं में डेढ़ किलो चना, 500 ग्राम जौ, 50 ग्राम मेथी, 50 ग्राम दालचीनी डालकर पिसवाएं। 5. घर में बढ़ते बच्चे हो, तो उनके लिए इस प्रकार से मल्टीग्रेन आटा तैयार करें - पांच किलो गेहूं में 250 ग्राम सोयाबीन, एक किलो चना और 500 ग्राम जौ मिलाकर पिसवाएं। इससे बच्चों की अच्छी ग्रोथ होगी।

डकार , पेट की गैस को मुंह से निकाला

 डकार में पेट की गैस को मुंह से निकाला जाता है जिसमें कभी कभी अजीब सी आवाज़ और गंध होती है। अधिकतर डकार आना किसी बीमारी का संकेत नहीं है। फिर भी समाज में इसे स्वीकार नहीं किया जाता। भारतीय और चायनीज़ संस्कृति में कुछ स्थितियों में इसे स्वीकार नहीं किया जाता। जापान में इसे शिष्टाचार के विरुद्ध समझा जाता है। पश्चिमी सभ्यता जैसे उत्तरी अमेरिका, फ्रेंच और जर्मन में भी डकार को उचित नहीं समझा जाता तथा ऐसा माना जाता है कि डकार आने पर आपको आवाज़ दबाने का प्रयत्न करना चाहिए तथा माफ़ी मांगनी चाहिए। हवा निगलने के कारण डकार आती है। पेट पहले भोजन नलिका तथा बाद में मुंह के माध्यम से गैस निकलने का प्रयत्न करता है। यहाँ डकार से राहत पाने के लिए 15 घरेलू उपचार बताए गए हैं। ये पदार्थ आपके रसोईघर में आसानी से उपलब्ध होते हैं।  1. अदरक: 1. अदरक: खाना खाने से पहले अदरक का पावडर या मिश्रण या अदरक एक छोटा टुकड़ा चबाने से डकार को रोका जा सकता है। यदि आपको इसका तीखा स्वाद सहन नहीं होता तो आप अदरक और शहद की चाय भी बना कर पी सकते हैं। पहले उबलते हुए पानी में किसा हुआ अदरक डालें तथा बाद में इसमें शहद या नींबू...

बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करने का इलाज और उपाय 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻

  1. बिस्तर गीला करने से रोकने के लिए बच्चे को सोने से पहले 1 ग्राम अजवाइन चूर्ण खिलाए या फिर अजवाइन को पानी में मिलकर इसका  काढ़ा बना ले और बच्चे को पिलाये। लगातार कुछ दिन इस घरेलू नुस्खे को करने से बेड वेटिंग की प्राब्लम दूर होने लगती है। 2. ठंड लगने की वजह कई बार बच्चे रात को बिस्तर में पेशाब कर देते है। ऐसी स्थिति में जरुरी है की बच्चे के शरीर को अंदर से गर्मी मिले। गुड के सेवन से शरीर में गर्मी आती है जिससे बिस्तर पर पेशाब करने में कमी आने लगती है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह गुनगुने दूध के साथ बच्चों को गुड खाने को दे। 3. बिस्तर पर पेशाब करने की आयुर्वेदिक दवा से उपचार के लिए नवजीवन रस की एक – एक गोली सुबह शाम दूध के साथ दे। कुछ दिन नियमित रूप से ये दवा लेने पर फरक दिखने लगेगा। 4. पानी में जायफल घिस कर इसका एक चौथाई चम्मच 1 कप गुनगुने दूध में मिला कर सुबह और शाम बच्चे को पिलाने से बिस्तर गीला करने की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है। 5. गुर्दे और मूत्राशय में इन्फेक्शन के कारण भी बड़ो और बच्चों को रात में बार बार पेशाब करने या रुक रुक कर पेशाब आने की बीमारी होने लगती है।...

समस्याओं की कारगर दवा है गुड़ और जीरे का पानी, आजमाकर देखि‍ए

1 शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए गुड़ और जीरे का यह पानी काफी लाभप्रद है। अगर आपको खून की कमी या एनिमिया की समस्या हो, तो इसे जरूर पिएं। 2 पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, गैस, पेट फूलना और पेट दर्द आदि के लिए गुड़ और जीरे का यह पानी काफी फायदेमंद साबित होगा। धीरे-धीरे आपकी यह समस्याएं खत्म हो जाएंगी। 3 शरीर की अंदरूनी सफाई करने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गुड़ और जीरे का पानी लाभदायक होता है। यह शरीर से अवांछित तत्वों को निकालकर आंतरिक अंगों की सफाई करता है। 4 शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द होने पर यह पानी कारगर उपाय है। यह शारीरिक दर्द में राहत दिलाने में मददगार साबित होता है और महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में भी राहत देता है। 5 बुखार, सर्दी व सिरदर्द होने की स्थ‍िति में भी गुड़ और जीरे का यह पानी बेहद फायदेमंद साबित होता है। बुखार आने पर इसका सेवन जल्द राहत दिलाने में सहायक है। 👉 जीरे और गुड़ का पानी बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में दो कप सादा पानी लें। अब इसमें एक चम्मच पिसा हुआ गुड़ और एक चम्मच जीरा मिलाएं और अच्छी तरह उबाल लें। उबालने के ब...

चुकंदर खाएं रोजाना,शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी होग

  1. चुकंदर का सेवन करने से एनीमिया, कब्ज, माहवारी की समस्या दूर होती है।  2. चुकंदर का सेवन शरीर में खून की मात्रा बढ़ाता है, इसलिए महिलाओं के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है।  3. चुकंदर का सेवन सलाद व जूस के रूप में करना काफी फायदेमंद होता है। इसमें आयरन, पोटेशियम,      फास्फोरस, कैल्शियम, विटामिन डी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं।  4. आयुर्वेद में बताया गया है कि यह खून तो बढ़ाता ही है, साथ ही पेशाब संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है।  5. चुकंदर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जिस वजह से ये कब्ज और बवासीर की तकलीफ को दूर करने में सहायक होता है।  6. चुकंदर का सेवन शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देता है और इस कारण रक्त साफ हो जाता है।  7. इसे नियमित खाया जाए तो ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है।  8. चुकंदर शरीर में कैल्शियम को बढ़ाता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।

सहजन के औषधीय गुण और फ़ायदे

दुनीया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है सहजन (मुनगा) 300 से अधिक रोगो मे बहुत फायदेमंद इसकी जड़ से लेकर फूल , पत्ती, फली, तना, गोन्द हर चीज़ उपयोगी होती है।  आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है।  सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना विटामिन सी- संतरे से सात गुना विटामिन ए- गाजर से चार गुना कैलशियम- दूध से चार गुना पोटेशियम- केले से तीन गुना प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन ,कैल्शियम , पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए , सी और बी काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।   इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसका बॉटेनिकल नाम मोरिगा ओलिफेरा है। हिंदी में इसे सहजन , सुजना , सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं. जो लोग इसके बारे में जानते हैं। वे इसका सेवन जरूर करते हैं।   सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है.  ये हैं सहजन के औषधीय गुण  सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में , इसकी फली वात व उदरशूल में , प...

कब्ज को दूर कर पेट हल्का करना है? तो ये 10 उपाय आजमाएं

1. अमरूद, पका हुआ केला, बेर, परवल, बैंगन, पपीता, अंगूर, अंजीर, आलू बुखारा, मुनक्का, आडू, उन्नाभ आदि का सेवन करें, कब्ज दूर रहेगा। 2. इस समस्या से निजात पाने के लिए आप चोकर समेत आटे की रोटी खाएं और मीठा दूध पियें। 3. रात को सोने से पहले गुनगुना दूध पी कर सोएं। 4. सब्जियों में पत्ती समेत मूली, काली तोरई, घीया, बैंगन, गाजर, परवल, पपीता, टमाटर आदि खाएं। 5. दालों का सेवन छिल्के समेत ही करें। 6. अगर दवा की जरूरत हो तो थोड़ा-सा खाने का सोडा पानी में घोलकर पी जाएं तो पेट हल्का रहेगा और शौच भी। 7. इमली में गुड़ डालकर मीठी चटनी बनाएं और इसका सेवन करें। इससे पेट साफ रहेगा। 8. भोजन के साथ सलाद में नमक डले टमाटर जरूर लें। नमक भी पेट साफ रखता है। कभी-कभी थोड़ा-सा पंचसकार चूर्ण भी ले लें। 9. भोजन के बाद सौंफ-मिस्री चबाने से भी पेट ठीक रहता है। 10. आधिक कब्ज होने पर त्रिफला, अभयारिष्ट बहुत अच्‍छे विकल्प है। इनसे पेट हल्का हो जाता है।